Gujrat verdict:- Lost opportunity by congress

गुजरात चुनाव परिणाम के दो दिन पहले श्री राहुल गाँधी जी ने कांग्रेस की कमान संभाली.कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर बैठने वाले गाँधी नेहरू परिवार के ये ६वे व्यक्ति है.गुजरात चुनाव में कांग्रेस एक बार फिर हारी और भाजपा ने लगातार छठवीं बार गुजरात की सत्ता पर कब्ज़ा किया है.राहुल गाँधी का कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर इस वक़्त बैठना कंही न कंही यह दर्शाता कि कांग्रेस को गुजरात में जीत का पूरा भरोसा था.

यहा कांग्रेस एकलौती विपक्षी पार्टी थी.इसके साथ ही तीन युवा नेतावो का भी कन्धा था जिनका अपने समुदाय में अच्छा खासा जनाधार भी है.विपक्ष के अन्य नेता लालू प्रसाद,अरविन्द केजरीवाल,अखिलेश यादव,और ममता बनर्जी ने भी कांग्रेस को समर्थन की घोषणा की थी.गुजरात के चर्च ने भी भाजपा को हराने के लिए अपने समुदाय के लोगो से लिखित में अनुरोध किया था.इसके साथ ही भाजपा के विरुद्ध २२ साल के राज्य की सत्ता और ३ साल की केंद्र की सत्ता विरोधी रुझान भी था.

इस बार नरेंद्र मोदी भी भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार नहीं थे.गुजरात में भाजपा अपना एक मुख्यमंत्री बदल चुकी थी.विजय रुपाणी भी ज्यादा सक्षम मुख्यमंत्री साबित नहीं हुवे है.अब चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा विजय रुपाणी के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है.गुजराती समाज उद्धयमी समाज माना जाता है.मोदी सरकार के दो बड़े आर्थिक कदम (GSTऔर नोटबंदी) से सबसे ज्यादा परेशानी उद्यमी समाज को ही उठाना पड़ा है.इस बात को समझते हुवे राहुल गाँधी ने GST को गब्बर सिंह टैक्स का नया नाम दिया था.परन्तु इसका ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा और सूरत जँहा राहुल गाँधी जी ने यह बात कही थी वँहा भाजपा ने भारी जीत हांसिल की है.

कांग्रेस की राह में सबसे बड़ा रोड़ा उसके नेतावो के अनर्गल बयान और लचर संगठन साबित हुवे.संगठन की हालत इतनी खराब है कि गुजरात कांग्रेस में बड़े चेहरे माने जाने वाले सभी नेता चुनाव हार गए है.अर्जुन मोढ़वानिया,शक्ति सिंह गोहिल, और सिद्धार्थ पटेल, सभी चुनाव हार गए है.गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी तो चुनाव में ही नहीं उतरे थे.

कांग्रेस पूर्णरूपेण राहुल गाँधी के करिश्मे और तीन युवावो की तिकड़ी के भरोसे बैठी थी.जबकि संगठन अगर प्रभावी होता तो चुनाव परिणाम बिलकुल बदल सकते थे.इसके विपरीत भाजपा अध्यक्ष बहुत अच्छे संगठनकर्ता माने जाते है.अब भाजपा की जीत में संगठन का बहुत ज्यादा योगदान होता है.कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में राहुल गाँधी जी को इस मसले पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है.पुराने समय में कांग्रेस सेवादल नाम का एक बहुत प्रभावी संगठन कांग्रेस के पास था.अब यह संगठन मृतप्राय है.अगर इस संगठन में जान फुँकी जाय तो कांग्रेस की कई मुसीबते कम हो सकती है.

कांग्रेस पर सकारात्म प्रभाव और भविष्य की नीति:-

राहुल गाँधी का मंदिर दर्शन के कार्यक्रमो ने भी थोड़ा प्रभाव डाला है.कांग्रेस समझ चुकी थी कि विपक्ष में कोई और पार्टी नहीं होने के कारन मुस्लिम और ईसाई वोटो के लिए कोई भी अन्य विकल्प नहीं है.इसीलिए कई वर्षो के बाद कांग्रेस ने थोड़ा हिंदूवादी रूख दिखलाया.राहुल गाँधी को ब्राह्मण भी बताया गया और यंहा तक कहा गया की वह जनेऊधारी ब्राह्मण है.

२०१९ के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का यह रूख उसे काफी फायदा पहुचायेगा.भाजपा के कट्टर हिंदूवादी राजनीति के जवाब में कांग्रेस का सॉफ्ट हिंदुत्व का नारा काफी प्रभाव डाल सकता है.कांग्रेस अपने इस रूख से भाजपा के समुदाय विशेष के तुष्टिकरण के आरोपों का भी समुचित जवाब दे सकती है.

राहुल गाँधी के नेतृत्व में यह चुनाव भले ही कांग्रेस हार गयी हो लेकिन कांग्रेस के भविष्य का रास्ता काफी उज्जवल और आसान हो गया है.राहुल गाँधी इस चुनाव को हारने के बाद भी अपने प्रदर्शन से खुश है तो निश्चित रूप से कांग्रेस के रणनीतकारो को कुछ बड़ा प्रभाव दिखा है.

गुजरात चुनाव में भाजपा को ९९ के आकड़े पर रोक देना भी कांग्रेस एक बड़ी उपलब्धि है.क्योकि ४ महीने पहले तक कांग्रेस को अपनी पुरानी सीटें वापस पाने की भी उम्मीद नहीं थी.अब कांग्रेस के पास पहले से ज्यादा सीटें है.प्रधानमंत्री जी का अपने गृह राज्य में कमजोर होना २०१९ के लिए उनकी राह कठिन बनाएगा.

राहुल गाँधी को सबसे बड़ा फायदा गुजरात चुनाव से यह हुवा है कि लगभग सभी विपक्षी नेतावो ने राहुल गाँधी को अपना नेता मान लिया है.२०१९ के लोकसभा चुनावों में लगभग पूरा विपक्ष राहुल गाँधी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने को को तैयार हो रहा है.राहुल गाँधी भी पहले ज्यादा परिपक्व हो चुके है.गुजरात के चुनाव में जैसा उन्होंने प्रदर्शन किया है और सरकार पर हमले किये है.उससे अब भाजपा के लिए राहुल गाँधी को नजरअंदाज करना मुश्किल होगा.एकजुट विपक्ष निश्चित रूप से २०१९ के चुनावों में भाजपा की मुसीबते बढ़ायेगा.

Image Source

जय हिन्द