Love Poetry

Love Poetry

क्या लिखुँ कुछ जीत लिखुँ या हार लिखुँ!
या दिल के सारा प्यार लिखुँ !
कुछ अपनों के जज़्बात लिखुँ!
या सपनो की सौगात लिखुँ!
मैं खिलता सूरज आज लिखुँ!
या चेहरा चाँद गुलाब लिखुँ!
वो डूबता सूरज को देखूँ
या उगते फूलो को सांस लिखुँ!
वो पल में बीते साल लिखुँ!
या सदियों लम्बी रात लिखुँ!
मैं तुम को अपने पास लिखुँ!
या दुरी के ऐहसास लिखुँ!
मैं अंधे के दिन में झाँकू!
या अंधो की मैं रात लिखुँ!
मीरा की पायल को सुन लूँ!
या गौतम की मुस्कान लिखुँ!
बचपन में बच्चों से खेलू
या जीवन की ढलती शाम लिखुँ!
सागर सा गहरा हो जाऊ
या अम्बर का बिस्तार लिखुँ!
सावन की बारिश में भीगु या आँखो की बरसात लिखुँ!
गीता का अर्जुन हो जाऊ या लंका रावण राम लिखुँ!
मैं हिन्दू मुस्लिम हो जाऊ या बेबस इंसान लिखुँ!
मैं एक ही मजहब को जी लूँ या मजहब की आँखे चार लिखुँ!
कुछ जीत लिखुँ या हार लिखुँ या दिल का सारा प्यार लिखुँ !

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जय हिन्द

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