ज़िन्दगी

ज़िन्दगी

कभी ठहरी तो कभी भागती सी लगती है ज़िन्दगी !
हकीकत तो कभी ख्वाब सी लगती है ज़िन्दगी !
लाख कोशिस की मगर सुलझाई न गई,
अनसुलझी इक पहेली सी लगती है ज़िन्दगी !
गम है कही कही खुशियों का ढेर है,
हर बात से अनजान सी लगती है जिंदगी !
है मिलान और जुदाई, हर चीज पराई,
उपहार भी खैरात सी , लगती है जिंदगी !
क्यों आसपास मेरे हर कोई उदास है,



क्या बात है, कि परी सी लगती है ज़िन्दगी !
यूँ शाम ओ शहर महफ़िले सजती रही………..
सोचा था अपनी जिंदगी को खुशियों से भर देंगे!
पर क्यों, भीड़ में भी तन्हा सी लगती है जिंदगी !
क्यों कोई अपना हमे समझ कर भी समझ नहीं पता,
क्यों इतनी कठिन सी लगती है ज़िन्दगी !

2)क्या खूब कहा है…किसी ने ..
मत सोच रे बन्दे********
इतना तू ज़िन्दगी के बारे में ………
जिसने ये ज़िन्दगी दी है######
उसने भी तो, कुछ सोचा ही होगा ”तेरे” बारे में …………….!!!!
हमेशा खुश रहना चाहिए!!!!!
क्योकि परेशाँ होने से कल को मुश्किल दूर न होती बल्कि आज का सुकून भी चला जाता है.

3.थोड़ा सा लाभ मिला, अहंकारी हो गए!
थोड़ा सा धन पाया, बेकाबू हो गए !
थोड़ा सा सम्मान पाया, पागल हो गए!
थोड़ा सा यश मिला, दुनिया पर ही हॅसने लगे!
थोड़ा सा अधिकार पाया, दुनिया को तबाह करने की ठान ली!
थोड़ा सा ज्ञान मिला, उपदेश की भाषा बोलने लगे !
थोड़ा सा रूप मिला, आईना को ही तोड़ दिया !
इस प्रकार तमाम उम्र, खुद को छलते रहे !
छकनी में पानी भरते रहे !
जो कभी रुकता नहीं !!!!!

4.”जीवन के हर मोड़ पर”
”सुनहरी यादों को रहने दो”
” जुबां पर हर”
”वक़्त मिठास रहने दो ”
”ये अंदाज है जीने का”
”ना खुद रहो उदास”
”ना ही दुसरो को रहने दो”
भगवन सिर्फ वहां नहीं है
जहां हम प्रार्थना करते है,
भगवन वहां भी है जहां
हम गुनाह करते है ….!!!

Image source

जय हिन्द